वो कांग्रेस नेता जिसकी बेटी की लोगों ने राहुल गांधी से शादी करवा दी थी!

अखिलेश सिंह. यूपी के अवध प्रदेश के सबसे बड़े नेताओं में से एक. रायबरेली से ताल्लुक. और कांग्रेस का यूपी में बड़ा नाम. कहा जाता है कि बहुत कोशिशों के बावजूद कांग्रेस के प्रभाव क्षेत्र में नहीं आ सके. लेकिन पार्टी के बड़े नेता बने रहे. बीच में पार्टी से कुछ दिनों की दूरी भी हुई, लेकिन फिर वापिस भी आए. आज मंगलवार यानी 20 अगस्त को उनका निधन हुआ. लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित थे.
एक समय था जब कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह का नाम यूपी के सबसे हाईप्रोफाइल मर्डर केस में सामने आया था. किसका मर्डर? सैयद मोदी का. बैडमिंटन खिलाड़ी. कई अवार्ड जीत चुका था. साल 1988 के जुलाई महीने में सैयद मोदी की हत्या हुई.
सैयद मोदी की हत्या में सबसे पहला नाम आया कांग्रेस नेता संजय सिंह का. अमेठी के राजा कहे जाते हैं. कांग्रेस नेता. बीते दिनों भाजपा में आ गए. कहा जाता है कि सैयद मोदी की पत्नी अमीता सिंह से संजय सिंह के संबंध थे. और इसी चक्कर में सैयद मोदी को मार दिया गया.
और कहा जाता है कि इस काम को अंजाम देने के लिए संजय सिंह ने साथ लिया अखिलेश सिंह को. उन्हीं अखिलेश सिंह को, जिनके बारे में हम यहां बात कर रहे हैं. दोनों जनमोर्चा के दिनों के साथी थे. आरोप है कि संजय सिंह और अखिलेश सिंह ने 1988 के जून महीने के तीसरे हफ्ते में इलाहाबाद के यांत्रिक होटल में एक पार्टी की थी. कहा जाता है कि इस होटल में सैयद मोदी की हत्या की प्लानिंग हुई.
मोदी की हत्या 28 जुलाई को हुई. सीबीआई ने दावा किया कि उसके पास सबूत हैं कि मोदी की हत्या के बाद तीन दिनों तक यानी 29, 30 और 31 जुलाई को अखिलेश सिंह ने संजय सिंह से दिल्ली में संपर्क साधने की कोशिश की. लेकिन सीबीआई ने कोई मजबूत साक्ष्य नहीं पेश किए. सीबीआई ने ये भी कहा कि अखिलेश सिंह ने मोदी की हत्या के लिए 4 शूटर भाड़े पर लिए थे, जिन्होंने मोदी की हत्या को अंजाम दिया.
बाद में संजय सिंह, अमीता कुलकर्णी और अखिलेश सिंह पर कोई अपराध सिद्ध नहीं हो सके. बरी हो गए. लेकिन 1990 बीतते-बीतते अखिलेश सिंह रायबरेली की सदर विधानसभा सीट अपने नाम कर चुके थे. और तीन दशक तक रायबरेली सदर विधानसभा सीट उनके पास रही. उनका प्रभाव इतना रहा, कहा जाने लगा कि रायबरेली और आसपास की सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा-जीतेगा, इस पर भी अखिलेश सिंह की चलती है. यही नहीं, जहां अमेठी को गांधी परिवार की गोद में लाने का श्रेय संजय सिंह को दिया जाता है. कहा जाता है कि अखिलेश सिंह ने रायबरेली में कांग्रेस पार्टी की फील्डिंग मजबूत की.
1993 में पहली बार विधायक चुने गए. कांग्रेस के टिकट पर. और उसके बाद रायबरेली की सदर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए. 2002 में तीसरी बार चुने तो गए. लेकिन राकेश पाण्डेय हत्याकांड में अखिलेश सिंह का नाम सामने आया. 2003 में इन आरोपों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने अखिलेश सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया. और इस समय पहली बार अखिलेश सिंह खुलकर कांग्रेस पार्टी के विरोध में सामने आए. रायबरेली का रॉबिन हुड कहे जाने वाले अखिलेश सिंह पर 45 से अधिक मुक़दमे दर्ज हुए. कहा जाता रहा है कि रायबरेली में कुछ भी होना हो, उसमें अखिलेश सिंह की मंजूरी ज़रूर चाहिए थी. इन सब आरोपों के बीच अखिलेश सिंह से कांग्रेस किनारा काटती गयी और मामला उनके निष्कासन तक चला गया.
लेकिन अखिलेश सिंह और कांग्रेस पार्टी के बीच की दूरी बहुत दिनों तक नहीं चल सकी. 2016 में प्रकाश में आती हैं अदिति सिंह. अखिलेश सिंह की बेटी. और अदिति सिंह कांग्रेस पार्टी की सदस्य हो जाती हैं. रायबरेली सदर से कांग्रेस पार्टी में उनका नाम फाइनल हो जाता है. ये वही समय था जब कांग्रेस राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को यूपी में अपनी नाव पार लगाने के लिए लेकर आई थी. और प्रशांत किशोर को बिजनेसमैन बताकर अखिलेश सिंह पार्टी के भीतर ही मुखालफत का एजेंडा फाने हुए थे. कहा था कि नेहरू-गांधी की पार्टी में एक बिजनेसमैन का क्या काम?
लेकिन तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद अदिति सिंह की उम्मीदवारी जारी रही. अदिति सिंह ने जीत दर्ज की. लेकिन जीत के बाद के डेढ़-दो सालों तक अदिति सिंह को उतना नाम नहीं मिला था, जितना “नाम” उन्हें राहुल गांधी के साथ एक फोटो के बाद मिला था. राहुल गांधी के साथ उनकी फोटो सामने आई. सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी कि अदिति सिंह राहुल गांधी की प्रेमिका हैं.
बात यहीं नहीं रुकी. लोगों ने अदिति सिंह और राहुल गांधी की एक दूसरे से ख़याली शादी तक करा दी. ये तक कहा गया कि जोड़ी अच्छी लग रही है. लेकिन फिर अदिति सिंह ने बात को साफ़ किया. सोशल मीडिया पर आयीं और कहा कि राहुल गांधी न सिर्फ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, बल्कि उनके राखी बड़े भाई हैं. इसके बाद कहीं जाकर इन सभी अफवाहों पर लगाम लग सकी.
अभी कुछ ही दिनों पहले अखिलेश सिंह फिर से सक्रिय हुए थे. बोली लोगों के बीच आई. कहा कि अनुच्छेद 370 और 35a हटाने का फैसला बिलकुल सही है. ये दोनों फैसले जवाहरलाल नेहरू की देन थे. गलत थे. कहा था,
“मैं मोदी और अमित शाह को साधुवाद देता हूं कि उन्होंने देश को एक किया. अनुच्छेद 370 देश को बांट सकता था.”
उन्होंने कांग्रेस के स्टैंड पर भी सवाल उठाए. इस मुद्दे का कांग्रेस ने दबी जुबां में विरोध किया था. लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं ने फैसले का समर्थन किया था, और ये भी कहा था कि ये फैसला लाने का तरीका असंवैधानिक है. इन बातों पर अखिलेश सिंह ने News 18 से कहा था,
“देश पहले हैं. उसे देशद्रोह की भाषा नहीं बोलनी चाहिए. कांग्रेस ने देश को बंटवाया. कांग्रेस की भाषा पाकिस्तान की भाषा है. आज पूरे देश में जश्न है. आज सही मायने में देश आज़ाद हुआ है.”
इन्हीं बयानों के बाद से ही बातें उठीं कि अदिति सिंह अमेठी के संजय सिंह के बाद ऐसी नेता हो सकती हैं, जो अब भाजपा ज्वाइन करेंगी. लेकिन अब तक तो ऐसा हो नहीं सका है.





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