फूलन देवी: जिन्होंने किया गैंगरेप, उन्हें लाइन में खड़ा करके गोली मार दी
ख़ास बातें
- अस्सी के दशक में चंबल में था फूलन का खौफ
- जिन ठाकुरों ने उनका गैंग रेप किया उन्हें गोली मार दी
- आत्मसमर्पण के बाद 8 सालों की हुई सजा
नई दिल्ली:
फूलन देवी (Phoolan Devi) का नाम आपने जरूर ही सुना होगा. फूलन देवी (Phoolan Devi) एक ऐसा नाम है जो अस्सी के दशक में चंबल समेत पूरे देश में चर्चित था. हाल यह था कि फूलन देवी (Phoolan Devi) का नाम सुन कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे.
बड़े से बड़े नेता और मंत्री भी फूलन देवी (Phoolan Devi) का नाम सुन कर डरते थे. आज फूलन देवी की पुण्यतिथि है (Phoolan Devi Death anniversary). आज हम आपको बता रहे हैं फूलन देवी (Phoolan Devi) के बारे में सबकुछ.
फूलन देवी (Phoolan Devi) का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के पुरवा गांव में हुआ था. फूलन देवी (Phoolan Devi) एक मल्लाह परिवार की थीं इस वजह से तथाकथित ऊंची जाति के लोग उनसे घृणा करते थे.
एक बूढ़े से हुई फूलन की शादी
फूलन देवी (Phoolan Devi) बैंडिट क्वीन (Bandit Queen) के नाम से चर्चित थीं. जब फूलन 11 साल की थीं तो उनके चचेरी भाई ने उनकी शादी पुट्टी लाल नाम के एक बूढ़े आदमी से करवा दी. दोनों में उम्र का एक बड़ा फासला होने के कारण दिक्कतें आती रहती थीं.
फूलन का पति उन्हें प्रताणित करता रहता था. आए दिन वह उनका रेप भी करता था. जिसकी वजह से परेशान होकर फूलन देवी ने पति का घर छोड़ कर अपने माता पिता के साथ रहने का फैसला किया.
तीन हफ्ते तक हुआ बलात्कार
फूलन देवी (Phoolan Devi) जब 15 साल की थीं तब गांव के ठाकुरों ने उनका गैंग रेप किया. इतना ही नहीं यह गैंग रेप उन्होंने फूलन के माता-पिता के समाने किया. फूलन देवी (Phoolan Devi) ने कई जगह न्याय की गुहार लगाई लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा का सामना करना पड़ा. नाराज दबंगों ने फूलन का चर्चित दस्यु गैंग से कहकर अपहरण करवा लिया. डकैतों ने लगातार 3 हफ्तों तक फूलन का रेप किया. जिसकी वजह से फूलन बहुत ही कठोर बन गईं.
डाकू बनीं फूलन देवी
अपने ऊपर हुए जुल्मों सितम के चलते फूलन देवी ने अपना एक अलग गिरोह बनाने का फैसला किया. 14 फरवरी 1981 को बहमई में फूलन देवी ने एक लाइन में 22 ठाकुरों को खड़ा करके गोली से उड़ा दिया. फूलन का कहना था कि जिन ठाकुरों ने उनका गैंग रेप किया था उन्होंने उनसे उसका बदला लिया है. इसका उन्हें कोई पछतावा नहीं था.
इंदिरा के कहने पर किया आत्म समर्पण
फूलन देवी ने 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर 10 हजार लोगों और 300 पुलिस वालों के सामने आत्म समर्पण कर लिया. उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा.
आत्मसमर्पण करने के बाद फूलन देवी को 8 सालों की सजा दी गई. 1994 में वह जेल से रिहा हुईं. रिहा होने के बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री ली. वह दो बार चुन कर संसद पहुंचीं. पहली बार वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से सांसद बनी थीं.
घर के सामने हुई हत्या
25 जुलाई 2001 को दिल्ली में घर के सामने उनकी हत्या कर दी गई. उस समय उनकी उम्र 38 साल थी. फूलन देवी की हत्या किसने की और क्यों की यह आज तक पता नहीं चल पाया है. फूलन देवी की हत्या का आरोप उनके पति उम्मेद सिंह पर भी लगा. लेकिन यह आरोप साबित नहीं हो पाया.
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